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बुधवार, 11 अगस्त 2021

उठ जाग मुसाफिर बावले के आंख फूटगी - कबीर दास की रचना

कबीर की रचनाएँ

Kabir Ke Shabd

उठ जाग मुसाफिर बावले के आंख फूटगी।
भाज के टिकट लेले गाड़ी छुटगी।।

साँच बता तनै लेन देन, कौनसी में जाना सै।
चौथा टेशन लेनदेन का,नहीं घबराना सै।
गर्म सर्द दो गैस जलें, अनहद का घाणा सै।
झूठ बोलनी छोड़ दिये, ना नरक ठिकाना सै।
चले सरासर आनन्द दुनिया सारी लूटगी।।

फर्स्ट सेकंड थर्ड फ़ॉर के, डिब्बे चार सैं।
बिना टिकट बैठेगा तो, भई डंडे त्यार सैं।
आगै पाछै घाट चले ना, जो थानेदार सैं।
बीच सिपाही रहें गैल में, सब हथियार सैं।
किस गफलत में सोग्या, दुनिया सारी उठली।।

गाड़ी में बैठा पाछै, एक टी टी आवैगा।
धुर का मांग ले डबल किराया, क्या बतलावैगा।
पकड़ गेर दें हवालात में, कौन छुड़ावैगा।
इस दुनिया में कौन तेरा, जो तनै रे बचावैगा।।
संग की साथन चली गई, तेरी माटी कूटगी।।

गाड़ी तैं उतर के जाना,गेट के धोरै।
बाबुजी तो टिकट माँग लें, सेठ के धोरै।
यम के दूत तेरै रस्सी घालै, पेट के धोरै।
पड़ा पड़ा रोवैगा, नरक की लेट के धोरै।।
सत्संग आला आनन्द मीराबाई लूटगी।।

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