गुरुवार, 29 जुलाई 2021

ये पांच बलि बलवान। Ye Panch Bali Balwan Kabir Ke Shabd.

Kabir Ke Shabd

ये पाँच बलि बलवान , क्यूँ बिर्च रहे सँसार में।।
पहला बलि काम जी, कर देता है बदनाम जी।
ईश्वर में रहता ना ध्यान, चित्त रह पराई नार में।।

दूजा बलि क्रोध जी, ये सबसे रखता है विरोध जी।
करदे कुनबे में घमासान, लठ बाजै परिवार में।।

तीजा बलि लोभ जी, ये भी देता है डोब जी।
बनना चाहवै धनवान, ना छके लाख हज़ार से।।

चौथा बलि मोह जी, ये भी देता है खोय जी।
चाहे कितनी ही होजा हार,यो सजा रह परिवार में।।
पाँ
चवां बलि अहंकार जी, इसने बड़े-२ दिये मार जी।
हरिदास करे बखान, डूबोगे मझधार में।।

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