कबीर भजन
नमो निरंजन स्वामी
नमो निरंजन -2 नमो निरंजन स्वामी
सदा विराजो मेरे उर में,अवगत अंतर यामी।
निरंकार निर्लेप निरंतर,निर्गुण सरगुन नामी
चिदानंद चैतन्य चहुँदिश,परम् गुरु परनामी।
सर्वांगी सम्पूर्ण सब घट सन्त रूप सुखधामी
जगन्नाथ जगपति जगजीवन,तू ही कृष्ण तू ही रामी।
व्यापक विष्णु विश्व बहुरंगी व्याप रहे सब ठामी
अगम अपार अधम अविनाशी,अटल पुरुष वर यामी।
मन मोहन मन हरण मनोहर,गुप्त गरुड़ के गामी
गुणातीत गोविन्द गोसाई,निर्मल नित नेह कामी।
तेज पुंज पारस परमेश्वर,तू महबूब गुमानी
नित्यानंद झड़ लगी मेहर की,हो रही आह्मी साहमी।

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