कबीर के भजनपी-२ मतना बोलपी-२ मतना बोल पपीहा रे पी-२ मतना बोलपी-३२ बोल मेरे विरह रे जगावेदिल है डावांडोल।दिन नहीं चैन रेन नहीं निद्राकिस ने कहूँ दिल खोल।शीश दिया मने पीव लिया रेइतने महंगे मोल।कथगी कमाली कबीरा थारी बाली जीमेरे उठें कालजे होल।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें