रविवार, 19 सितंबर 2021

कबीर भजन हरे राम मुख बोल - Kabir Das Hare Ram Mukh Bole

Kabir das bhajan Hare Ram Mukh Bol

कबीर भजन 
हरे राम मुख बोल

हरे राम मुख बोल,संकट कट ज्यागा।
राम नासँ में लीन जो रहते,
नहीं उखड़े की कौड़ी कहते
जमे के लाखों मोल,के मानव दत्त ज्यागा।
पाप ने सहम रहा दबको रे,
आगे चाले नहीं ल्हको रे,
उड़े खुल जा सारी पोल,के मनवा डट ज्यागा।
रोज करा कर भजन बन्दगी,
दूर हटा दे विषय गंदगी,
मन की घुंडी खोल,के पूरा पट ज्यागा।
सत्संग की जो आध घडी हो,
हज़ार साल के तप से बड़ी हो,
सन्तों का ये तोल, ना मासा घट ज्यागा
चन्द्र भान ये सन्त बताते,
दौष हैं सत्संग से खो जाते,
वहां बजे ज्ञान का ढोल,अवगुण कट ज्यागा

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