मोह की महिमा
मोह की महिमा है प्रबल, इसमें नाहीं सुख।
जो इसमें रहा फंसा, वह पायेगा दुःख॥
एक वृद्ध पुरुष को उसके पौत्र ने किसी बात पर दो तीन लात घूंसे मारकर घर से निकाल दिया। इस पर वह वृद्ध नगर के बाहर जाकर रोने लगा और अपने पौत्र को गालियाँ देने लगा। उसी मार्ग में एक साधु आ निकले। साधु बाबा उस वृद्ध से पूछने लगे- तुम क्यों रो रहे हो?
तुम्हें किसी से कुछ कष्ट पहुँचाया है। वृद्ध बोला-मेरे पुत्र और पौत्र सबके सब बहुत निकम्मे हैं। मेरे पास जो धन दौलत थी वह उन्होंने आपस में बाँट ली परन्तु मेरे भोजन के लिए उनके पास कुछ नहीं है। मैं जब भी अपना मुँह खोलता हूँ तो वे मुझे मारने लगते हैं। आज तो हद हो गई मुझे मेरे पौत्र ने लातों और घूँसों से मारकर घर से बाहर निकाल दिया। इस कारण मैं दुःखी होकर रो रहा हूँ और अपने पौत्र को गालियाँ दे रहा हूँ।
उन महात्मा ने कहा--बंधुवर! इस संसार में पुत्र और पौत्र सब मतलब के यार हैं और सुख के साथी हैं। जब तक उन्हें सुख देते रहोगे तब तक वे तुम्हारे हैं परन्तु अब तुम इन लोगों को दुःख देने के अतिरिक्त प्रसन्न करने के योग्य नहीं रहे। इस संसार में सब लोग अपने-अपने सुख के लिए एक दूसरे से परस्पर स्नेह करते हैं। जिसका जिससे तब तक मतलब रहता है तब तक वह उससे प्यार करता है। बिना मतलब के और स्वार्थ के कोई किसी से प्रीति नहीं करता। अब तुम उठो और मेरे साथ वन में चलो। शेष आयु सूर्य के समान प्रकाशवान भगवान श्री कृष्ण की आराधना में व्यतीत करो।
महात्मा की बात सुनकर वह वृद्ध क्रोध में भरकर बोला- आपको किसने चौधरी नियुक्त किया है जो मुझे समस्त परिवार तथा घर छोड़ने का परामर्श दे रहे हो। में उसका दादाजी हूँ और वह मेरा पौत्र है। तुम कौन होते हो जो हमारे बीच में उपदेश करने को खड़े हो गये हो। ईश्वर मेरे पौत्र की लम्बी आयु करे चाहे वह मुझे मारा ही क्यों न करे। क्या बालकों के मारने पर घर छोड़ा जाता है? आये बड़ा उपदेश देने वाले, चले जाओ यहाँ से यह झूँठे उपदेश किसी और को देना।
महात्मा जी चुप हो गये और सोचने लगे कि देखो इसी को कहते हैं कि मोह की महिमा। यह वृद्ध ऐसी दुर्दशा होते हुए भी मोह माया के ऐसे जाल में फँसा है कि जिससे इसका छुटकारा मिलना असम्भव है।
भाइयों! वास्तव में हम सबकी भी यही स्थिति है। इसलिए हम सबको उचित है कि अपने जीवन निर्वाह के लिए अपना प्रबन्ध स्वयं करके आयु के शेष भाग को भगवान की याद में व्यतीत करें। वृद्धावस्था में प्रति दिन गायत्री मंत्र का जाप करें। जो आदमी अपने घरवालों एवं कुट॒म्बियों के बलबूते पर आयु का शेष भाग व्यतीत करने को इच्छा रखते हैं उन्हें अन्त में इस वृद्ध की भाँति दुःख उठाना पड़ता है।

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