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बुधवार, 11 अगस्त 2021

गुरू थारे बिना, बिगड़ी ने कौन सँवारे - कबीर के दोहे हिंदी

कबीर दास दोहे

Kabir Ke Shabd

गुरू थारे बिना, बिगड़ी ने कौन सँवारे।।
एक दिन बिगड़ी पिता पुत्र में, बांध खम्भ के मारे।
अपने भक्त की सहाय करन ने, नरसिंह देही धारे।।

एक दिन बिगड़ी राजसभा में, द्रोपदी नाम पुकारे।
वा के चीर अनन्त बढाए दुष्ट दुशाशन हारे।।

एक दिन बिगड़ी जन नरसी की, समधी जी के द्वारे।
आए साँवरिया भात भरा, भक्तों के कारज सारे।।

ज्यूँ ज्यूँ भीड़ पड़ी भक्तन पे, त्युं त्युं विपद सँहारे।
घिसा सन्त करो गुरु कृपा, जीता दास पुकारे।।

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