मंगलवार, 2 फ़रवरी 2021

मन ना रंगाए, रंगाए जोगी कपड़ो - कबीर दास जी का भजन

कबीर दास जी की वाणी

Kabir ke Shabd

मन ना रंगाए, रंगाए जोगी कपड़ो।
काम क्रोध ने डेरा डाला,
मांग मांग के खाया टुकडो
घर घर जा कर अलख जगाया,
गलियन का भुसाया कुतड़ा।

बनखंड जाकर धुना लाया
दिल ना जलाया, जलाया गठरा।।

आजकल के नए नए साधु,
जोहड़ पे जाके खिंडाया फफड़ा।

कह कबीर सुनो भई साधो,
सत्तनाम का ना लाया रगड़ा।।

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