कबीर भजन
तन का तनिक भरोसा नाहीं, काहे करत गुमाना रे।
टेढ़ चले मरोड़ मूंछे, विषय याहि लिपटाना रे।
ठोकर लगे चेतकर चलना,कर जान प्रान पियारा रे।
मेरा मेरा करते डोले,माया देख लुभाना रे।
या बस्ती में रहना नाहीं, साचा धर उठ जाना।
मीर फकीर और जोगी, रहा ना राजा रानी रे ।
पर तक तक मारे काल, अचानक बाना रे।
काम क्रोध मद लोभ छोड़कर, शरध धनी के आना रे।
कहत कबीर सुनो भाई सन्तो
बिसरि नाम तिरलोकहु नहीं ठिकाना रे।
भावार्थ (Meaning)
कबीर कहते हैं कि इस शरीर का कोई भरोसा नहीं है। मनुष्य को भौतिक चीज़ों में लिप्त ना होकर, नाम-स्मरण और साधु मार्ग पर चलना चाहिए। शरीर नश्वर है और सभी सांसारिक चीज़ें मिट जानी हैं, इसलिए ध्यान और सच्चे जीवन पर ध्यान देना चाहिए।
जीवन संदेश
- भौतिक मोह से ऊपर उठो।
- नाम-स्मरण और भक्ति को अपनाओ।
- क्रोध, लोभ, मद और काम को त्यागो।

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