बुधवार, 14 जनवरी 2026

साँपदा का डोरा – धूलैंडी और होली से जुड़ी धार्मिक परंपरा

साँपदा का डोरा: धूलैंडी से जुड़ी एक प्राचीन परंपरा

हिंदू धर्म में होली का पर्व केवल रंगों और उल्लास तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़ी कई धार्मिक और लोक परंपराएँ भी प्रचलित हैं। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण परंपरा है साँपदा का डोरा, जिसे विशेष रूप से होली के दूसरे दिन, अर्थात धूलैंडी के दिन लिया जाता है।

साँपदा का डोरा धूलैंडी के दिन होली की अग्नि से शुद्ध किया जाता हुआ कच्चे सूत का डोरा

साँपदा का डोरा क्या है?

साँपदा का डोरा कच्चे सूत से बनाया जाता है, जिसमें कुल सोलह तार होते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह डोरा नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करता है और घर-परिवार में सुख, शांति एवं समृद्धि बनाए रखने के लिए लिया जाता है।

साँपदा का डोरा लेने की विधि

धूलैंडी के दिन कच्चे सूत के सोलह तार लिए जाते हैं। इन तारों को विधिपूर्वक जलती हुई होली की अग्नि दिखाकर शुद्ध किया जाता है। इसके बाद इन सभी तारों को एक साथ जोड़कर डोरा बनाया जाता है और श्रद्धा के साथ सुरक्षित स्थान पर रख लिया जाता है।

धार्मिक मान्यता

मान्यता है कि होली की अग्नि में सभी नकारात्मक शक्तियाँ नष्ट हो जाती हैं। जब कच्चे सूत के तारों को इस अग्नि से स्पर्श कराया जाता है, तो वे पवित्र हो जाते हैं। साँपदा का डोरा घर में रखने से बुरी नजर, अनिष्ट और भय से रक्षा होती है।

निष्कर्ष

साँपदा का डोरा हमारी लोक परंपराओं और आस्था का प्रतीक है। यह परंपरा हमें हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ती है और यह सिखाती है कि त्योहार केवल उत्सव नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शुद्धि का माध्यम भी होते हैं।

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