मंगलवार, 13 जनवरी 2026

होली का पूजन विधि | होलिका दहन पूजा, सामग्री और महत्व

होली का पूजन | होलिका दहन की संपूर्ण पूजा विधि

होली का पावन पर्व फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय, श्रद्धा, परंपरा और पारिवारिक संस्कारों का प्रतीक है। होली के दिन विधि-विधान से पूजन करने से सुख-समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है।

होली का पूजन और होलिका दहन की संपूर्ण पूजा विधि जानें। पूजा सामग्री, नियम, परंपराएं और धार्मिक महत्व विस्तार से हिंदी में।

🌸 प्रातःकालीन पूजन विधि

होली के दिन सुबह सबसे पहले हनुमान जी एवं पितरों को श्रद्धापूर्वक प्रणाम करें। इसके बाद जल, रोली, मौली, चावल, फूल, प्रसाद एवं नारियल अर्पित करें। दीया एवं धूप जलाकर ठाकुरबाड़ी में भी पूजा करें और घर के सभी सदस्यों को टीका लगाएं।

भैरों जी का स्मरण कर बच्चों से हाथ लगवाकर तेल मंगवाएं और उसे चौराहे पर रखवाएं। इसके पश्चात अपने इष्ट देवता की पूजा करें। यदि घर में पुत्र जन्म या पुत्र के विवाह का उद्यापन करना हो, तो होली का दिन इसके लिए विशेष शुभ माना जाता है।

🍽️ उद्यापन एवं भोग विधि

उद्यापन के लिए तेरह स्थानों पर चार-चार पूड़ी, थोड़ा हलवा एवं अपनी श्रद्धा अनुसार रुपये रखें। सासूजी के चरण स्पर्श कर दक्षिणा दें। सुपारी की माला बनाकर उसे घर में सुरक्षित रखें।

शाम के समय पक्की रसोई बनाएं। होली पर विशेष रूप से आटे का हलवा, पूरी, बड़ा, साग, फली, करिया एवं पापड़ बनाए जाते हैं। इन सभी व्यंजनों को देवताओं के नाम की थाली में निकालकर भगवान को भोग अर्पित करें।

भोग की थाली बामनी को दें, ब्राह्मण को भोजन कराएं और तत्पश्चात स्वयं भोजन ग्रहण करें।

🔥 होलिका दहन पूजन विधि

पूजन से पहले भूमि को गोबर और जल से चौका दें। बीच में चार औखली रखकर मालाओं से सजाएं। होलिका दहन के समय जेलमाला (बडकुल्ला की माला) की पूजा करें।

घर में जितने पुरुष हों उतने काठ के खांडे और जितने लड़के हों उतनी काठ की तलवारें चढ़ाएं। पूजन के बाद तलवारें घर में सुरक्षित रखें।

जल, मौली, रोली, चावल, फूल, गुलाल, गुड़, पीसा और माला अर्पित करें। दीया जलाकर चार परिक्रमा करें। जेलमाला में से चार मालाएं घर में रख लें।

सभी पूजा सामग्री, कच्चे सूत की कुकड़ी एवं मालाएं टोकरी में रखकर होलिका दहन स्थल पर ले जाएं। नारियल एवं अन्य सामग्री अर्पित कर होलिका की पूजा करें।

🌙 रात्रि की परंपरा

होलिका दहन के बाद थोड़ी सी पवित्र अग्नि घर लाकर कमरे में धूप दें। रात को छत पर जाकर जल से सात बार अर्घ्य दें, रोली और चावल अर्पित करें।

होलिका के चार गीत एवं बंधावे गाएं। सासूजी के चरण स्पर्श कर दक्षिणा दें। अगले दिन प्रसाद ग्रहण करें और अपने नौकर, जमादारनी आदि को होली के रुपये दें।


📌 निष्कर्ष:
होली का पूजन धार्मिक आस्था, पारिवारिक परंपरा और सामाजिक सद्भाव का सुंदर संगम है। विधि-विधान से किया गया होली पूजन जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाता है।

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