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Rahat indori – Teri har baat mohabbat me gawara karke (राहत इन्दौरी – तेरी हर बात मोहब्बत में गवारा करके)

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Rahat indori – Teri har baat mohabbat me gawara karke (राहत इन्दौरी – तेरी हर बात मोहब्बत में गवारा करके)

Rahat indori - Teri har baat mohabbat me gawara karke

Rahat Indori
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Teri har baat mohabbat me gawara karke
Teri har baat mohabbat me gawara karke
Dil ke bajar me baithe hai khasara karke


Ek chingari nazar aayi thi basti me use
Wo alag hat gaya aandhi ko Ishara karke
Mai wo dariya hu ki har boond bhawar hai jiski
Tumne accha hi kiya Mujhse kinara karke


Muntazir hoon ki sitaron ki zara aankh lage
Chand ko chat pe bula lunga ishara karke
Rahat Indori


<——Uski katthai aankhon me hain jantar-mantar sab       Ye zindagi sawaal thi jawab mangne lage—->
Collection of Rahat Indori Ghazals and Shayari
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तेरी हर बात मोहब्बत में गवारा करके
तेरी हर बात मोहब्बत में गवारा करके
दिल के बाज़ार में बैठे हैँ ख़सारा*  करके
एक चिन्गारी नज़र आई थी बस्ती मेँ उसे
वो अलग हट गया आँधी को इशारा करके
मुन्तज़िर* हूँ कि सितारों की ज़रा आँख लगे
चाँद को छत पे बुला लूँगा इशारा करके
मैं वो दरिया हूँ कि हर बूँद भंवर है जिसकी
तुमने अच्छा ही किया मुझसे किनारा करके
*ख़सारा – हानि, क्षति, नुक्सान
*मुन्तज़िर –  इंतज़ार करने वाला
राहत इन्दौरी 
<—–उसकी कत्थई आँखों में हैं जंतर मंतर सब          ये ज़िन्दगी सवाल थी जवाब माँगने लगे—–>
राहत इन्दौरी कि ग़ज़लों और शायरियों का संग्रह
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