KABIR KE SHABDहो विदेशी प्यारे, मेरी अँखियाँ जोहवै बाट।हम परदेसी तुम परदेसी, म्हारै प्रेम उचाट।खबर हमारी लइ ना मुरारी, हम अटकी ओघट घाट।।नेह नगर से चल कर आई, प्रेम बनजरी हाट।।तन मन शीश साईं ले लीजे, करो प्रीति सांट।।नित्यानन्द महबूब गुमानी म्हाने मिलियो खोल कपाट।।
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