सोमवार, 12 जुलाई 2021

जाग जा मुसाफिर प्यारे- Jaag Ja Mushaphir Pyare Kabir ke Shabd

Jaag ja Mushaphir Pyare Kabir ke Shabd

Kabir Ke Shabd

जाग जा मुसाफिर प्यारे, सोवै मतना।
हीरे से जन्म ने व्यर्था खोवै मतना।।
शीश तलै और पग ऊपर थे, जब गुरु से इकरार किया।
ऐसी मेहर करी सद्गुरु ने, तूँ अंदर से बाहर किया।
सद्गुरु नाम बिसार दिया अब रोवै मतना।।
कर्मा के तेरे लेख रे बंदे, छांटे जांगे रे।
धर्म राज के आगे वे ना, नाटे जांगे रे।
काटे जांगे कांटे रे मूर्ख बोवै मतना।।
मातपिता और कुटुम्ब कबीला, सब छोड़ेंगे साथ तेरा।
हाथ पैर भी हालें कोन्या, सब टूटेंगे दांत तेरा।
फेर दुःख पावै गात तेरा, तूँ रोवै मतना।।
माटी का यो बना पुतला एक दिन होगा रेत तेरा।
फेर पाछै पछतावैगा, जब चिड़िया चुग जा खेत तेरा।
धर्मदास कह चेत नींद में सोवै मतना।।

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