रविवार, 25 जुलाई 2021

कोठे ऊपर कोठरा हेली री - Kothe Uper Kothra Kabir Shabd

Do Naino ke Beech Kabir Das ji Shabd

Kabir Das Shabd

दो नैना के बीच, रमैय्या प्यारा रम रह्यो हे हेली दो।।
कोठे ऊपर कोठरा हेली री, जहां चढ़ बैठा मोर।
मोर बिचारा के करै, जब घर में घुस गए चोर।
माल सारा हड़ लिया हे हेली।।
धोबन धोवै कपड़ा हेली री, त्रिवेणी के घाट।
मछली साबुन ले गई री, कुनबा बाराबाट।
लग्न वा की लग रही है हेली।।
उर्द कुँआ मुख सांखडा हे हेली, लम्बी वा की डोर।
पाँच सखी पानी भरैं हे, भर लिया समन्द झकोल।
जंग वाकी बज रही हे हेली।।
कह कबीरा धर्मिदास सर हे हेली, सुन्न शिखर के बीच।
सुन्न शिखर में चांदना हे हेली, बिन बाती बिन तेल।।
चश्म वा की चस रही हे हेली।।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें