Kabir Ke Shabd
सुखसागर में आए के मत जाइये रे हंस प्यासा।
गगन मण्डल में अमिरस बरसै, पीले साँसमसांसा।
धन्ना ने पिया सुदामा ने पिया, और पिया रैदासा।।
ध्रुव ने पिया प्रहलाद ने पिया, मिट गई मन की त्रासा।
गोपीचंद भरथरी पिया, हुआ शब्द प्रकाशा।।
शबरी ने पिया कमाली ने पिया, पी गई मीराबाई खासा।
कह कबीर प्रेम रस पीओ, थारी पूर्ण होजा आशा।।

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