Kabir Ke Shabdमिलते नहीं हैं भगवान, गुरुआं के बिना।।गंगा में न्हाले चाहे जमना में नहा ले।न्हाले न चाहे हरिद्वार।।मन्दिर में जाले चाहे मस्जिद में जा ले।जाले नै चाहे, चारों धाम।।गीता को पढ ले चाहे, रामायण पढ़ लेपढ ले न वेद पुराण।।चाहे तुम तो माला जप लो, चाहे तुम तो धूनी रमा लो।चाहे ले लेना सन्यास।।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें