रविवार, 1 अगस्त 2021

मिलते नहीं हैं भगवान, गुरुआं के बिना - कबीर दास के दोहे अर्थ सहित pdf

कबीर का जीवन परिचय
Kabir Ke Shabd

मिलते नहीं हैं भगवान, गुरुआं के बिना।।
गंगा में न्हाले चाहे जमना में नहा ले।
न्हाले न चाहे हरिद्वार।।

मन्दिर में जाले चाहे मस्जिद में जा ले।
जाले नै चाहे, चारों धाम।।

गीता को पढ ले चाहे, रामायण पढ़ ले
पढ ले न वेद पुराण।।

चाहे तुम तो माला जप लो, चाहे तुम तो धूनी रमा लो।
चाहे ले लेना सन्यास।।

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