Kabir Ke Shabd
भाई अंत समय में, काम ना आवै तेरै रोना।।
मनुष्य जन्म का चोला पाकर, बीज भर्म का बोना।
बिना भजन कीमत नहीं इसकी, बेगी यो मत खोना।।
बालापन हंस खेल गंवाया, भरी जवानी सोना।
वृद्ध हुआ कफ वायु ने घेरा, फेर भजन नहीं होना।।
मेर तेर में बंधा फिरै, तेरै लग रहा भूल भुलोना।।
फेर पछताए के हो भोंदू, चलै ना जादू टोना।।
घरड घरङ घेंटी में बोलै, दूभर पानी चोना।।
लम्बे-२सांस घालके, यो चल दिया हंस बरौना।
मान बड़ाई तोड़ बगा सब, गुरू भावानन्द का होना।
कह ओंकार लाख में पावै, दाग जिगर का धोना।।

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