शनिवार, 7 अगस्त 2021

उस घर की हमने खोल बता दो - कबीर दोहा

Kabir Ke Shabd

उस घरकी हमने खोल बता दो, कौन था देव पुजारा जी।
धरती भी नहीं थीं अम्बर भी नहीं था, नहीं था सकल पसार जी।
चन्दा भी नहीं था सूरज भी नहीं था, नहीं था नोलख तारा जी।।

अल्लाह भी नहीं था, खुदा भी नहीं था,नहीं था मुल्ला और काज़ी जी।
वेद भी नहीं था गीता भी नहीं थीं, नहीं था बाँचनहारा जी।।

गुरु भी नहीं था चेला भी नहीं था, नहीं था ज्ञानी और ध्यानी जी।
नाद भी नहीं था, बिंदु भी नहीं था, नहीं था साखी शब्द वाणी जी।।

ब्रह्मा भी नहीं था, विष्णु भी नहीं था, नहीं था शंकर देवा जी।
कह कबीर सुनो भई साधो,सत्त था देव पुजारा जी।।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें