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| Kabir Ke Shabd |
कबीर के शब्द
क्यों चालै सै आंगा बांगा, चिता बीच तनै धर देंगे नंगा।
एक अग्नि का ला के पतंगा, तेरे फिर जांगे च्यारों ओड़।।
सिहराने खड़ी तेरी माई रोवे, भुजा पकड़ के भाई रोवे।
पांया में खड़ी तेरी ब्याही रोवे, जिसने लाया बांध के मोड़।।
पांच सात तेरे चलेंगें साथ मे, गोसा पुला लेके हाथ मे।
एक अर्थी का ले बाँस हाथ मे, तेरे देंगे सिर नै फोड़।।
शंकर दास ब्राह्मण गावै, सब गुणियों को शीश झुकावै।
अपना गाम जखोली बतावै, वो तो गया रै मुलाहजा तोड़।।
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