शुक्रवार, 4 मार्च 2016

मन कर ले साहब से प्रीत || Man kr le shab se preet Kabir Ke Shabd ||

kabir das ki vani
Kabir Ke Shabd 
कबीर के शब्द
मन करले साहब से प्रीत।
शरण आए सो सब ही उतरे, ऐसी उन की रीत।।

सुंदर देह देख मत फूलों, जैसे तृण पर सीत।
काची देह गिरे आखिर को, ज्यों बालू की भींत।।

ऐसो जन्म फेर नहीं आवे, जाए उम्र सब बीत।
दास गरीब चढ़े गढ़ ऊपर, देव नगारा जीत।।

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