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| Kabir Ke Shabd |
कबीर के शब्द
मन करले साहब से प्रीत।शरण आए सो सब ही उतरे, ऐसी उन की रीत।।
सुंदर देह देख मत फूलों, जैसे तृण पर सीत।
काची देह गिरे आखिर को, ज्यों बालू की भींत।।
ऐसो जन्म फेर नहीं आवे, जाए उम्र सब बीत।
दास गरीब चढ़े गढ़ ऊपर, देव नगारा जीत।।
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