कबीर शब्द
मेरे हिवरे में बस गए रामा,
मेरे हिवरे में बस गए रामा,
हरि दर्शन की प्यास हमारे,कद पहुंचो उस गामा।
प्रेम घटा जब चढ़ी रे गगन में,भीज थे मेरे दामा।
चित्त चातक पि पि लौ लाई, रटत रहे हरी नामा।
नाला नैन हिलोर हिए की,बहत रहे निशि यामा।
रक्त मांस दोउ भेंट विरह की,रहे अस्त और चामा।
स्वामी गुमानी राम द्र्श्य में,जाए कहि पैगामा।

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