गुरुवार, 9 दिसंबर 2021

कबीर भजन मेरे मन मूर्खा भाई-Kabir bhajan Mere mann murkha Bhai

Kabir bhajan Mere mann murkha Bhai

कबीर भजन 
मेरे मन मूर्खा भाई

मेरे मन मूर्खा भाई,गुरु बिन जागा कोण सी घाटी।
आगम से पाछम चल आया,बंक नाल की घाटी
इस काया में दस दरवाजे,पंक लगे ना टाटी।
घाटी है दूर पहुचना मुश्किल,आगे विषम कराटी
रपट पड़े तो ठौड़ ना पावे,जग में होजा हांसी।
हिन्दू मुसलमान बन दिए,बीच भर्म की टाटी
सांस यमों ने छीन लई तेरी पड़ी रह गई माटी।
सौदा करे तो यहाँ ही करले,आगे भीचवां घाटी
बैल बने कंगाल का तेरे ऊपर बाजें लाठी।
कह कबीर सुनो भाई साधो,ये सुनने की बाती
यम राजा की फ़ौज खड़ी है,त्रिवेणी के घाटी।

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