Kabir ke Shabdपाँचों हे तत्व मिलाके, चरखा अजब बनाया रंग लाके।।तीन गुणों का तक़वा ए डारा, सत्त की माल चढाकै।।पांच पच्चीस इसमें घली ए पाँखडी।खूंटे चार जँचा कै।।जब तेरा चरखा नया ए नवेला,सब मोहें चित्त लाकै।।जब तेरा चरखा हुआ रे पुराना,सब बोलैं बखड़ा कै।।कह कबीर सुनो भई साधो।धर दिये राछ जला कै।।
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