Kabir ke Shabdहम हैं मस्त दीवाने लोग, हमने राम जाना रे।।ज्ञान ध्यान सहजै पाया सुमरण।प्रेम वचन मुख बोल।।ऊंच नीच की भिन्न ना म्हारै।ना कोय दुविधा तोग।।किरया कर्म भर्म ना म्हारै।ना कोय संशय सोग।।घिसा सन्त शैल है निर्गुण।पाई वस्तु रे अनमोल।।
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