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बुधवार, 14 जुलाई 2021

सद्गुरु ने बो दिया हेला रे, तुम सुनियो सन्त सुजान - कबीर साहब के निर्गुण भजन

Kabir Ke Shabd

सद्गुरु ने बो दिया हेला रे, तुम सुनियो सन्त सुजान।।

और जन्म बहुतेरे होंगे, मानस जन्म दुहेला रे।।

अरब खरब लग माया जोड़ी।
संग चले ना एक धेला रे।।

तूँ तो कह मैं लश्कर जोड़ूँ।
जाना है तुझे अकेला रे।।

ये तो मेरी चलती बरियाँ।
सद्गुरु पार पहेला रे।।

कह कबीर सुनो भई साधो।
शब्द गुरु चित्त चेला रे।।

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