शनिवार, 30 अप्रैल 2016

कबीर क्या तन मांजता रे -कबीर के शब्द-kyu tan maanjtaa re , aakhir maati men mil jaanaa।

कबीर के शब्द 
kabir ki ulti vani


क्यू तन मांजता रे , आखिर माटी में मिल जाना।
माटी ओढन माटी पहरन , माटी का सिरहाना।
माटी का कलबूत ;बनाया ता में भॅवर समाना ।।
माटी कहे कुम्हार से रे , क्या गोदे मोय ।
एक दिन ऐसा आएगा रे , में गोदूंगी तोय ॥

चुन चुन कंकर महल बनाया , बन्दा कहे घर मेरा ।
ना घर तेरा , ना घर मेरा , चिडया रैन बसेरा ॥
फटा ये चोला नया पुराना , कब लग सी वै दर्जी ।
दिल का मरहम कोई ना मिल्या , जो मिल्या अल गर्जी ॥

नानक चोला अमर भया जब , संत जो मिल्या दर्जी ।
दिल के मरहम संत मिलेंगे , उपकारण के गर्जी ॥

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