माटी ओढन माटी पहरन , माटी का सिरहाना।
माटी का कलबूत ;बनाया ता में भॅवर समाना ।।
माटी कहे कुम्हार से रे , क्या गोदे मोय ।
एक दिन ऐसा आएगा रे , में गोदूंगी तोय ॥
एक दिन ऐसा आएगा रे , में गोदूंगी तोय ॥
चुन चुन कंकर महल बनाया , बन्दा कहे घर मेरा ।
ना घर तेरा , ना घर मेरा , चिडया रैन बसेरा ॥
ना घर तेरा , ना घर मेरा , चिडया रैन बसेरा ॥
फटा ये चोला नया पुराना , कब लग सी वै दर्जी ।
दिल का मरहम कोई ना मिल्या , जो मिल्या अल गर्जी ॥
नानक चोला अमर भया जब , संत जो मिल्या दर्जी ।
दिल के मरहम संत मिलेंगे , उपकारण के गर्जी ॥
दिल का मरहम कोई ना मिल्या , जो मिल्या अल गर्जी ॥
नानक चोला अमर भया जब , संत जो मिल्या दर्जी ।
दिल के मरहम संत मिलेंगे , उपकारण के गर्जी ॥

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें