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कठिन सांवरे की प्रीत, हे री लागै सोई जाणै-Kabir Ke Shabd-kathin saanvre ki prit, he ri laagai soi jaanai।।

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Kabir Ke Shabd 

कबीर के शब्द
कठिन सांवरे की प्रीत, हे री लागै सोई जाणै।।
के जानै कोय दिल का मरहमी,
के जानै जगदीश।।

लड़ गया सर्प जहर विष काला,
उठें लहर शरीर।

हैं तजीदुलड़ी तिलड़ी ,तजीपँचलडी,
पहनी प्रेम जंजीर।।

मीरा के पृभु गिरधर नागर,
डिगी बन्धाइयो म्हारी धीर।।

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