शनिवार, 7 अगस्त 2021

भाई अंत समय में काम ना आवै तेरै रोना - संत कबीर

कबीर के दोहे pdf

Kabir Ke Shabd

भाई अंत समय में काम ना आवै तेरै रोना।।
मनुष्य जन्म का चोला पाके बीज भर्म का बोना।
बिना भजन कीमत नहीं इसकी, बेगी यो मत खोना।।

बालापन हंस खेल बिताया,भरी जवानी सोना।
वृद्ध हुआ कफ वायु ने घेरा, फेर भजन नहीं होना।।

मेर तेर में बंधा फिरै, तेरै लग रहा भूल भुलोना।
फेर पछताय के हो भोंदू, चले ना जादू टोना।।

घर्ड घर्ड घेटी में बोलै, दूभर पानी चोना।
लम्बे-२साँस घाल के, यो चल दिया हंस बरौना।।

मान बड़ाई तोड़ भगा सब, गुरू भावानन्द का होना।
कह ओमकार लाख में पावै, दाग जिगर का धोना।।

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